Thursday, 29 January 2026

प्रशिक्षण के माध्यम से साइबर सुरक्षा के प्रति लोगों को किया गया जागरूक

डुमरी प्रखंड कुटुम्बा के डुमरी गांव में सीएससी वीएलई द्वारा तीन दिवसीय साईबर सुरक्षा प्रशिक्षण का आयोजन

डुमरी (औरंगाबाद):

डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी की घटनाओं को देखते हुए आम नागरिकों को जागरूक करना आज की बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए डुमरी प्रखंड अंतर्गत कुटुम्बा गांव, डुमरी में सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) वीएलई के द्वारा तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा जागरूकता प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।


इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के प्रति जागरूक करना था।

साइबर ठगी से बचाव की दी गई महत्वपूर्ण जानकारियाँ

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए सीएससी वीएलई राजू चौधरी ने साइबर अपराधियों द्वारा अपनाए जाने वाले विभिन्न हथकंडों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि थोड़ी-सी जागरूकता और सतर्कता से हम बड़ी ठगी से बच सकते हैं।

उन्होंने कहा कि आजकल साइबर अपराधी खुद को—

पुलिस अधिकारी

बैंक कर्मचारी

सीबीआई या ईडी अधिकारी

बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे ट्रांसफर करवाते हैं।

फोन कॉल से होने वाली ठगी से कैसे बचें

राजू चौधरी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति—

पुलिस की वर्दी में फोटो या वीडियो कॉल करे

अनजान नंबर से फोन कर तुरंत पैसे भेजने को कहे

खुद को अधिकारी बताकर धमकाए

तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसे किसी भी व्यक्ति का—

नाम

मोबाइल नंबर

गूगल पर सर्च करें, और यदि जरा-सी भी शंका हो तो तत्काल स्थानीय थाना को सूचना दें।

बैंक और दस्तावेज़ों की जानकारी साझा न करें

प्रशिक्षण में विशेष रूप से यह चेतावनी दी गई कि—

कभी भी किसी अनजान व्यक्ति को बैंक डिटेल, ओटीपी, एटीएम नंबर न दें

आधार कार्ड और पैन कार्ड की फोटो या जानकारी साझा न करें

कई बार साइबर अपराधी लोगों को यह कहकर डराते हैं कि उनका आधार या पैन कार्ड ड्रग तस्करी या अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय तुरंत पुलिस को सूचित करना चाहिए।

गैर-जमानती वारंट दिखाकर डराने की चाल

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि साइबर ठग अक्सर मोबाइल पर—

फर्जी गैर-जमानती वारंट

कोर्ट के कागजात की कॉपी

भेजकर लोगों को मानसिक रूप से डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। ऐसी किसी भी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। इसकी तुरंत जानकारी पुलिस को देनी चाहिए।

साइबर ठगी होने पर क्या करें?

यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाए, तो—

तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें

जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक होगी

लोगों में दिखा जागरूकता का सकारात्मक असर

तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में ग्रामीणों की अच्छी भागीदारी देखने को मिली। लोगों ने सवाल पूछे और साइबर सुरक्षा से जुड़ी कई भ्रांतियों को दूर किया। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने डिजिटल लेन-देन को लेकर अधिक सतर्क रहने का संकल्प लिया।



निष्कर्ष

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम साबित करता है कि यदि सही तरीके से जानकारी दी जाए तो आम लोग भी साइबर अपराध से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। सीएससी वीएलई राजू चौधरी द्वारा किया गया यह प्रयास डिजिटल इंडिया की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

Zenith Think ऐसे जागरूकता अभियानों को समाज के लिए बेहद आवश्यक मानता है और भविष्य में भी इस तरह की सकारात्मक खबरों को प्रमुखता से प्रस्तुत करता रहेगा।

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