वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे पीड़ित किसानो के अधिकारों के लिए शंखनाद
जिला औरंगाबाद में राष्टीय राजमार्ग प्राधिकरण के भारत माला परियोजना
के अंतर्गत प्रस्तावित वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे के लिए जिला समाहर्ता
औरंगाबाद के द्वारा भूमि –अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है । कल दिनांक
हिंदुस्तान (15/03/2023) के दैनिक समाचार पत्र में भारत सरकार के राजपत्र 3 डD 825
का प्रकाशन कराया गया है । हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में
02/08/2022 में 3 A का प्रकाशन पहले कराया जा चूका है ।
जिला प्रशासन का कहना है की 3 A के प्रकाशन के बाद 21 दिनों के अंदर
आपति ली जानी थी । जिन किसानो ने आपति दी, उन किसानो की आपेक्षों को सुन लिया गया ।
3 C के तहत इसके बाद 3 D प्रकाशन कराया गया हैं ।
किसान संघर्ष समिति वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे के पीड़ित , प्रभावित किसानों का कहना है की अधिकतर किसानों को 3 A के बारे में जानकारी या सूचना नहीं मिला । तर्क ये दिया की किसानो की इतनी क़ानूनी जानकारी नहीं होती है।उनके घर में समाचार पत्र नहीं आता है। किसान संघर्स समिति का जागरूकता और आंदोलन के कारण आज हम 3 D के बारे में जान पाए है ।
इस बाबत किसान संघर्ष समिति का शिष्टमंडल जिला पदाधिकारी महोदय सह भू अर्जन पदाधिकारी से अपनी मांगो को रखा था । लेकिन जिला अधिकारी महोदय ने स्पष्ट रूप से किसानों की बात मानने से इंकार कर दिया था । भू अर्जन के द्वारा भी वही बात दोहराई गई। जो जिला पदाधिकारी ने बताया उनलोगों ने कहा की एक्ट के विरुद्ध हो रहा है तो बोलिए जो कानून है वही होगा ना ।जिला पदाधिकारी महोदय ने यह भी कही की व्याकुलता में मत रहिए बल्कि आपलोगों को खुश होना चाहिए ।आपको भाग्यशाली समझना चाहिए की ये परियोजना आपके क्षेत्र से गुजर रही है। आपलोगों का वैल्यू बढ़ जायगा । हमारे लिए तो सभी किसान अध्यक्ष हैं ।
किसानो का दर्द यह है। उनकी जीविका का आधार खो रहा है । अपने खून पसीने मेहनत की कमाई से अपने परिवार का लालन पोषण , शिक्षण , सांस्कृतिक , सामाजिक और आर्थिक संवहन कर लेते थे। जब उनकी जमीन चली जायगी तो उनके साथ उन कृषक श्रमिको का क्या होगा ? यह सोंच सोंच के किसान और श्रमिक घोर अवसाद के शिकार हो रहे हैं । किसान भाइयो का कलेजा फट रहा है की मेरी वर्षो पुरानी विरासत धरोहर माँ का चिर हरण होने वाला है । अब नहीं बोलेंगे तो अपनी धरती माँ को मुहं क्या दिखलायेंगे ?
जब लोगों को किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डेय के माध्यम से किसानों को जब पता चला तो प्रकृति को लेकर भारी गड़बड़ी है । जैसे की जिन किसानो का जमीन आवसीय, राष्टीय राजमार्ग के किनारे , राज्य राजमार्ग के किनारे , प्रधान मंत्री सड़क योजना के किनारे , ग्राम सड़क के किनारे है, उनका भी प्रकृति के सर्वे में सर्वेयर ने किसी का भीठ, परती कदीम ,धनहर लिखा गया । किसानों का आपति है की जो राष्टीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग के किनारे या सटे की जमीन है, उसकी प्रकृति व्यवसायिक की जाए तथा जिनकी जमीन ग्राम सड़क के किनारे है, उनकी जमीन की प्रकृति आवासीय की जाए । लेकिन लगातार जिला समाहर्ता के द्वारा विधि पूर्वक कड़ी आगे बढाई जा रही है । किसान असमर्थ और लाचार होते दिख रहे है ।
राजन तिवारी मिडिया प्रभारी का कहना है सेम परियोजना में सड़क की किनारे की जमीन का मूल्यांकन महँगी दरों पे किया जाता है, इससे समर्थित उनके पास दस्तावेज है परन्तु यहाँ जिला समाहर्ता के द्वारा कहना है की नहीं हम तो MVR से ही आकलन करेंगे इस बात पर किसानो को हजम नहीं हो रहा है , किसान चाहते है की हमें उचित मुआवजा मिले जिससे की हम आगे की जीविका का साधन बना सके और अपने परिवार समाज को बिखरने से बचा ले ।
क्रांतिकारी नेता राज कुमार सिंह का कहना है की जब जमीन का कर हमने व्यवसायिक तथा आवसीय भुगतान बिहार राज्य को किया है तो हम मुआवजा एक ही तराजू धनहर के नाम से कैसे ले ले । यहाँ पर समाहर्ता द्वारा कहा जा रहा है। वर्तमान स्वरुप तो आप हमसे कैसे कर ले लिए । इस मामले पे भी किसानो में ज्वाला की चिंगारी भड़क रही है जो कभी भी शोला बन कर उभर सकती है।
किसान संघर्ष समिति के मिडिया प्रभारी विकाश कुमार सिंह ने कहा की हम
किसान धैर्यशील है, हमारी धरती माँ परीक्षा ले रही है ,आत्म विश्वाश को कमजोर नहीं
होने देना हैं, मजबूती से डटकर मुकाबला विधि पूर्वक क़ानूनी पूर्वक करना है और
लोकतंत्र में सबको आवाज बुलंद करने का अधिकार है। कानून के विरोध में ही सही किसान
बिल भी लाया गया था ।अगर आत्मबल कमजोर होता तो वह भी किसानो पर थोप दिया जाता
इसलिय धैर्य राखिय अनुसाशन बनाये रखे हम विधि पूर्वक अपनी लड़ाई लड़ेंगे और हम
लड़ेंगे हम जीतेंगे ।








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