'ओर' गाँव में एक्सप्रेसवे के लिए भूमि मापी का सामूहिक विरोध
■ औरंगाबाद जिला से गुजर रहे वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफिल्ड एक्सप्रेसवे के तहत् भूमि मापी की प्रक्रिया शुरू की गई है जिसका पुरे कुटुम्बा प्रखंड में जबरदस्त विरोध देखने को मिल रहा है। बरौली के बाद 'ओर' गाँव के ग्रामीणों ने भी अधिग्रहित की जा रही भूमि के मापी का सामूहिक विरोध किया है। मौके पर उपस्थित वरिष्ठ किसान नेता सह किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डेय ने बताया की किसानों की मुआवजा दर और एमवीआर अपडेट करने को लेकर प्रशासन पुरी तरह मौन है। पूर्व डीएम सौरभ जोरवाल और भू-अर्जन पदाधिकारी अमित कुमार ने पूर्व में यह आश्वासन दिया था कि हर गाँव के एमवीआर को अपडेट कर 40% की वृद्धि की गई है लेकिन बाद में यह बात झुठी साबित हुई। यह हमारे साथ धोखा जैसा है। गाँव के सङक किनारे की आवासीय प्रकृति की जमीन और एनएच 139 के किनारे की भूमि पर भी प्रशासन पुरी तरह मौन है।
किसान संघर्ष समिति के युवा नेता विकास सिंह ने बताया की बार-बार आग्रह करने के बावजूद मुआवजा की दर पहले की तुलना में और कम ही कर दिया गया है। प्रशासन 2015 से जो एमवीआर चला आ रहा था उसी को आधार बनाकर मुआवजे की राशि को निर्धारित किया है जबकि किसी प्रदेश में ऐसा नहीं होता।
दूसरे वरिष्ठ किसान नेता राजकुमार सिंह ने यह बताया की झुठ पर झुठ बोलकर किसानों की जमीन हङपने की कोशिश की जा रही है। हमारी हजारों आवेदन को कुङेदान में फेंककर प्रशासन भूमि मापी की प्रक्रिया में सम्मिलित होकर लुटेरों का साथ दे रही है जो किसानों को कभी अच्छा मुआवजा नहीं देना चाहते हैं। ओर गाँव के रहने वाले युवा सदस्य विक्की सिंह ने सरकार पर जमीन लुटने का आरोप लगाते हुए यह कहा की हम किसी भी कीमत पर बिना मुआवजा दर बढ़े अपनी जमीन देने को तैयार नहीं हैं। सरकार यह जानती है की रजिस्ट्री के समय जानबूझकर कम कीमत पर लिखाई किया जाता है जिसका खामियाजा किसान को भुगतना पङ रहा है।
वरिष्ठ किसान नेता जगत सिंह ने मालिक गैरमजरूआ जमीन पर सरकार की अस्पष्ट नीति को लेकर हमला बोला और कहा कि सरकार के द्वारा जारी नोटिफिकेशन डी में मालिक गैरमजरूआ और बकाश्त मालिक भूमि का रिटर्न होने के बावजूद प्रकाशन नहीं किया गया जिससे हजारों किसान चिंतित हैं। हमारी सैकङों एकङ ऐसी भूमि पर अब भी गतिरोध बरकरार है।
किसानों ने ऊचित मुआवजा न मिलने तक आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया है। मौके पर किसान नेता वीरेंद्र पाण्डेय, रामाशीष सिंह, कपिलदेव सिंह, राजकुमार सिंह, विकास सिंह, रामबदन सिंह, विजय सिंह, अनिल सिंह, वीरेन्द्र सिंह, रामाश्रय सिंह, वीरन सिंह, जगन्नाथ सिंह, जगनारायण सिंह, विक्की सिंह, कामाख्या सिंह, सुदेश सिंह इत्यादि उपस्थित थें।



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