Saturday, 5 August 2023

जाति जनगणना करने वाली बिहार सरकार को किसान संघर्ष समिति का खुला पत्र।

 जैसा की हमें ज्ञात हुआ है कि हाईकोर्ट ने आपलोगों को पुनः जाति जनगणना करने संबंधी फैसला दे दिया है। क्या उस जाति जनगणना में कुटुम्बा प्रखंड के महसू और बरवाडीह के दलित परिवार भी आते हैं जिनकी घर को वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस वे उजाङ रही है! क्या उस जाति जनगणना के बाद इन दलितों के पुनर्वास संबंधी कोई नीति भी आपकी सरकार लाएगी या सिर्फ जाति की राजनीति को बल देने के लिए आपकी सरकार इस जाति जनगणना के पीछे हाथ धोकर पङी है। महाशय, बरवाडीह की विधवा एक दलित महिला सिपति देवी आपसे यह सवाल करना चाहती है कि उनके घर को उजाङने के बाद आपकी भू-अर्जन विभाग, औरंगाबाद उनके लिए क्या व्यवस्था करेगी! क्या उनके लिए पुनः वो छत और दरवाजे सरकार मुहैया करा पाएगी या लाखों भूमिहीन दलितों के जैसा ही वो फिर से सङक पर आ जाएंगे!



महाशय, बगल के ही गाँव महसू के प्रसाद राम की पूरी घर आपका भू-अर्जन विभाग एक्सप्रेसवे के लिए तोङ रही है। प्रसाद राम जी के पास इस घर के अलावे न तो कोई कृषि के लिए खेत है और न ही घर बनाने के लिए कोई जमीन। तो क्या आपके जाति जनगणना के बाद इन लोगों की आर्थिक स्थिति और घर इनको आप दिला पाएंगे या सिर्फ जाति जनगणना एक राजनीति है क्योंकि जिसतरह से आपकी निरंकुश भू-अर्जन विभाग के पदाधिकारी दलित बस्तियों के प्रति उदासीन हैं और उनसे कभी बात भी नहीं करना चाहते इस स्थिति में न्याय की आशा किनसे लगाई जा सकती है!



महोदय, महसू के ही सहेंद्र पासवान के पास घर मिलाकर मात्र 5 कठ्ठा जमीन थी। तीन भाईयों में बँटा ये जमीन आज पूरी तरह से एक्सप्रेसवे में समां चुकी है। सहेंद्र के लिए न तो आपके कोई पदाधिकारी सहज उपलब्ध हैं और न ही उनकी ऐसी आर्थिक स्थिति है कि वो अपनी लङाई  इस भ्रष्ट और अनियमितता में डुबे हुए भू-अर्जन विभाग से लङ सकें।



महाशय, महसू की दलित महिला बुधनी देवी का परिवार आज भी फुस के छप्पर में रहते हैं। परिवार में 20 सदस्य हैं। पुरा का पुरा परिवार एक्सप्रेसवे के कारण विस्थापित होकर दर-बदर होने की स्थिति में है। न तो इनके पास खेती की जमीन है और न ही पुनः छप्पर डालकर रहने के लिए 1 डीसमील जमीन, फिर शौचालय और इंदिरा आवास की बात करना तो बेईमानी ही है। क्या आपकी जाति जनगणना इन तमाम लोगों को इनका बुनियादी जरूरत भी दिला पाएगी इसमें मुझे घोर संदेह है।


महाशय, आपके आने के बाद प्रशासनिक क्रुरता और भ्रष्टाचार चरम पर है। प्रशासनिक उदासीनता लोगों का गला दबा रही है, इस स्थिति में वंचित और दलित लोगों की स्थिति और जर्जर हो चुकी है और इनसब के बीच आपके भू-राजस्व और भू-अर्जन विभाग की घोर लापरवाही ने कितनों का घर उजाङकर उनका वास्तविक मुआवजा भी नहीं सौंपा है और हमारे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस वे के किसानों के साथ भी ये यही दुहरा रहे हैं।


किसान संघर्ष समिति, कुटुम्बा औरंगाबाद

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