दिवाली क्यों मनाते है? दिवाली मनाने की भारत में क्या वजह है?
दिवाली 🪔
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥ इसका अर्थ ये है की असत्य से सत्य की ओर।अंधकार से प्रकाश की ओर।मृत्यु से अमरता की ओर।(हमें ले जाओ)
ॐ शांति शांति शांति।।
दिवाली का दूसरा नाम दीपोत्सव , दीपावली तथा प्रकाश पर्व के नाम से भी जानते हैं।इसे दीपों का त्योहार भी कहा जाता हैं। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या ( अक्टूबर या नवंबर ) को मनाया जाता है और भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। आध्यात्मिक रूप से यह 'अन्धकार पर प्रकाश की विजय' को दर्शाता है। दिवाली के कई दिनों पहले से ही लोग अपने घरों की साफ सफाई करते है। यह धनतेरस से लेकर भाई दूज तक पांच दिन चलता है। दिवाली पर लोग खिलौने, आभूषण, मिठाईयां तथा कपड़े की खरीदारी करते है। दिवाली के दिन लोग नए कपड़े पहनते है। लोग अपने घरों को सुंदर रंगोली ओर दीयों से सजाते है। हर घर में अलग अलग तरह के व्यंजन और पकवान बनाए जाते है। लोग एक दूसरे को दिवाली की शुभकामना देते हैं। यह त्योहार सब लोग मिल जुलकर मानते है। दिवाली स्वच्छता और प्रकाश का पर्व है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश की जीत को दर्शाता है। यह त्योहार सभी के जीवन में खुशी प्रदान करता हैं।
माना जाता है कि दीपावली के दिन अयोध्या के राजा राम अपने चौदह वर्ष के वनवास के पश्चात लौटे थे। अयोध्यावासियों का हृदय अपने परम प्रिय राजा के आगमन से प्रफुल्लित हो उठा था। श्री राम के स्वागत में अयोध्यावासियों ने घी के दीपक जलाए। कार्तिक मास की सघन काली अमावस्या की वह रात्रि दीयों की रोशनी से जगमगा उठी। तब से आज तक भारतीय प्रति वर्ष यह प्रकाश-पर्व हर्ष व उल्लास से मनाते हैं। भारतीयों का विश्वास है कि सत्य की सदा जीत होती है और असत्य का नाश होता है।
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धन्यवाद


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