ZENITH THINK
touch to future
Wednesday, 9 September 2020
Monday, 7 September 2020
"Only Education can bring peace in the world" says Mr Satish Kumar Singh
औरंगाबाद :- सन 1966 में पहला विश्व साक्षरता दिवस मनाया गया था और वर्ष 2009-2010 को संयुक्त राष्ट्र साक्षरता दशक घोषित किया गया। तभी से लेकर आज तक पूरे विश्व में 8 सितंबर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है।अब सवाल यह उठता है, कि इस दिन को कैसे मनाया जाता है। कहीं पर समारोह का आयोजन कर, साक्षरता को लेकर भाषण दिए जाते हैं, तो कहीं गरीब बस्तियों में जाकर शिक्षा का अलख जगाने का प्रयास किया जाता है। कहीं केवल साक्षरता और निरक्षरता के आंकड़ों की तरफ लोगों का ध्यान आकर्षित कर लिया जाता है।
इस बार शुरूआत बताने या समझाने से नहीं, समझने से करते हैं। एक नई शुरूआत खुद से करते हैं। साक्षरता दिवस पर एक प्रण करते हैं, उस यज्ञ में आहुति देने का, जो शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए बरसों से किया जा रहा है, लेकिन उसकी ज्वाला उतनी तीव्रता से धधक नहीं पा रही। जरूरी नहीं है, कि इसके लिए हमें कोई बड़े काम से शुरूआत करनी हो। आहुतियां छोटी ही होती है, लेकिन यज्ञ का महत्व और उद्देश्य बड़ा होता है। ठीक वैसे ही हमारी छोटी-छोटी कोशिशें भी कई बार बड़ा आकार लेने में सक्षम होती हैं।
अगर आप घर पर किसी
गरीब बच्चे को न पढ़ा पाएं, तो अपने क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर कोई छोटा सा
समूह बनाकर, उसके स्कूल जाने की व्यवस्था जरूर कर सकते हैं।
आप कुछ वक्त निकालकर, उन पिछड़े क्षेत्रों व लोगों के बीच
शिक्षा के महत्व को साक्षा कर सकते हैं।
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आप ज्ञान के प्रकाश
से वंचित तबके को इस बात एहसास करा सकते हैं, कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई
उम्र नहीं होती। आप कम से कम सरकार की शिक्षा संबंधी योजनाओं की जानकारी तो बांट
सकते हैं, जो आपके छोटे से प्रयास से अंधकारमय जीवन में एक
नया दीपक जला सकती है। क्योंकि शिक्षा रोजगार या पैसे से ज्यादा खुद के विकास के
लिए जरूरी है।
इस लेख के लिए सोनू तिवारी जी (#CASir) का विशेष आभार
छठ पर्व की तरह जितिया व्रत पर भी नहाय-खाय की परंपरा
अश्विन मास (Ashwin maas) के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जीवित्पुत्रिका (Jivitputrika Vrat) मनाया जाता है. इसे जिउतिया या जितिया व्रत भी कहा जाता है. पुत्र की दीर्घ, आरोग्य और सुखमयी जीवन के लिए इस दिन माताएं व्रत रखती हैं. तीज की तरह यह व्रत भी बिना आहार और निर्जला रखना पड़ता है. जितिया व्रत (Jitiya Vrat) इस साल गुरुवार, 10 सितंबर को रखा जाएगा. आइए जानते हैं इस व्रत की पूजन विधि और शुभ मुहूर्त.
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छठ पर्व की तरह जितिया व्रत पर भी नहाय-खाय की परंपरा होती है. यह पर्व तीन दिन तक मनाया जाता है. सप्तमी तिथि को नहाय-खाय के बाद अष्टमी तिथि को महिलाएं बच्चों की समृद्धि और उन्नत के लिए निर्जला व्रत रखती हैं. इसके बाद नवमी तिथि यानी अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है यानी व्रत खोला जाता है.
महाभारत के युद्ध में पिता की मौत के बाद अश्वत्थामा बहुत नाराज था. सीने में बदले की भावना लिए वह पांडवों के शिविर में घुस गया. शिविर के अंदर पांच लोग सो रहे थे. अश्वत्थामा ने उन्हें पांडव समझकर मार डाला. कहा जाता है कि सभी द्रौपदी की पांच संतानें थीं. अर्जुन ने अश्वत्थामा को बंदी बनाकर उसकी दिव्य मणि छीन ली. क्रोध में आकर अश्वत्थामा ने अभिमन्यु की पत्नी के गर्भ में पल रहे बच्चे को मार डाला.
ऐसे में भगवान कृष्ण (Jai shree krishna) ने अपने सभी पुण्यों का फल उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को पुन: जीवित कर दिया. भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से जीवित होने वाले इस बच्चे को जीवित्पुत्रिका नाम दिया गया. तभी से संतान की लंबी उम्र और मंगल कामना के लिए हर साल जितिया व्रत रखने की परंपरा को निभाया जाता है.
जितिया व्रत का शुभ मुहूर्त 10 सितंबर को दोपहर 2 बजकर 5 मिनट से अगले दिन 11 सितंबर को 4 बजकर 34 मिनट तक रहेगा. इसके बाद व्रत पारण का शुभ समय 11 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक रहेगा.YOUTUBE ZENITH CRECHE ZENITH DIGITAL








