Wednesday, 28 February 2024

विज्ञान का अस्तित्व महंगे उपकरणों में नहीं , अपितु स्वंतत्र चिंतन और कठोर श्रम में निहित है :- रमन

आज, जेनिथ विद्यालय ने उत्सव और संवाद के माध्यम से राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का महत्वपूर्ण दिन को एक नई ऊर्जा और ज्ञान के साथ मनाया । विद्यार्थियों ने इस अवसर पर विज्ञान के महत्व को समझाने और समाज में इसकी महत्वता को उजागर करने के लिए अपनी सोच का विस्तार पूर्वक संवाद किया ।


इस अद्भुत अवसर पर, विद्यार्थियों ने विज्ञान के लाभों को व्यापक रूप से बताया और उसके आधुनिक उपयोग के बारे में अद्वितीय दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में विज्ञान के महत्व को विशेष रूप से उजागर किया, जो मानव समाज के स्वास्थ्य और कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसके साथ ही, उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की भूमिका को भी जागरूक किया, जो हमारे भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कृषि, शिक्षा, और मनोरंजन के क्षेत्र में विज्ञान के योगदान को भी महत्वपूर्ण माना।

इस समारोह में निबंध, भाषण, कविता, और प्रस्तुतियों के माध्यम से, विद्यार्थियों ने अपनी अद्वितीय दृष्टि से विज्ञान के महत्व को उजागर किया और समाज को विज्ञान के प्रति जागरूक किया।

प्रधानाध्यपिका रिंकी  सिंह ने  बताया कि कल के युवा विद्यार्थी  उत्कृष्ट और संवेदनशील नागरिक हैं जो विज्ञान के महत्व को समझते हैं और उसके उत्तरदायित्व को समझते हैं। इसे बढ़ावा देने के लिए, हम सभी को इन युवाओं की प्रेरणा और उत्साह की सराहना करते हैं और हम आशा करते हैं कि यह उत्साह और ज्ञान समृद्धि का संकेत है और समाज के प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में आगे बढ़ेगा।

विज्ञान शिक्षिका रागनी कुमारी ने रमण प्रभाव के बारे में प्रयोग करके बतया जब किसी अणु या मोलेक्यूल को प्रकाश के साथ प्रक्षिप्त किया जाता है, तो वह प्रकाश एक हद तक विकर्ण होता है। इस प्रकार, रमन प्रभाव के आधार पर हम वस्तुओं की संरचना, संरचनात्मक गुण और रासायनिक प्रक्रियाओं का अध्ययन कर सकते हैं। इस प्रभाव का आविष्कार सर सी. वी. रमन द्वारा 28 फरवरी 1928 में दुनिया के सामने प्रकाश में लाया गया था ।


निदेशक विकाश कुमार सिंह ने बतया  कि 1954 में देश के सर्वोच्य नागरिक अलंकरण “भारत रत्न” से वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रामन को विभूषित किया गया ।


इस अवसर पर ख़ुशी कुमारी, रागनी कुमारी, आस्था कुमारी , शिव शंकर प्रसाद , खुशबु कुमारी तथा रानी कुमारी उपस्थित रहें ।

वादों को स्मरण दिलाने के लिए किसानों का मौन मार्च होगा - संयुक्त किसान मोर्चा

आज पार्थ पैलेस औरंगाबाद में , संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वाधान में  वरीय किसान वशिष्ठ  सिंह की अध्यक्षता में संयुक्त बैठक किया गया  जिसका संचालन किसान विकाश कुमार सिंह ने किया।

बैठक के अतिथि रहे भारतीय किसान यूनियन के बिहार और झारखंड के प्रदेश प्रभारी रहे श्री दिनेश कुमार ने कहा की औरंगाबाद  में ही प्रधानमंत्री मोदी जी ने मंडल डैम के पानी खेतो में पहुंचाने का वादा किया था । आज 2024 हो गया लेकिन लाल पानी के लिए खेत अभी बूंद बूंद तरस रहे है।

किसान संघर्ष समिति के सचिव जगत सिंह ने कहा की यही औरंगाबाद में एनटीपीसी परियोजना में शत प्रतिशत गैरमंजरुआ मालिक बकास्त भूमि का रैयतिकरन कर भुगतान किया गया है तो भारतमला में पीड़ित किसानों को इससे वंचित क्यों किया जा रहा है।

वरीय किसान चंद्रमोहन तिवारी ने बताया की जो सरकार हमलोग को मुआवजा भुगतान करना चाहती है वह बिलकुल बाजार भाव से नगण्य है बल्कि कानून है की वर्तमान बाजार भाव से चार गुना मुआवजा देना है।

राष्टीय मजदूर विकाश मंच के अध्यक्ष श्री मनोज सिंह ने बताया की मोदी जी देश के प्रधानमंत्री है, उन्होंने उतर कोयल सिंचाई परियोजना का पानी किसानों के खेत तक पहुंचाने की गारंटी ली थी। मगर कार्य के नाम पर लूट और रस्म अदायगी हुई।उनके द्वारा दी गई गारंटी को हम सभी किसानों का कर्तव्य बनता है की उनको बतलाए की आपके द्वारा किया गया घोषणा से भी हमलोग लाभान्वित नही हुए है।

बैठक में आधे दर्जन से अधिक जिले के  किसान संघटनो ने भाग लिया। बैठक में जाने माने क्रांतिकारी किसान नेता भोला यादव भी संबोधित किया।

संयुक्त किसान मोर्चा ने निर्णय लिया की प्रधानमंत्री को स्मार पत्र देकर उनके द्वारा कोयल नहर सिंचाई परियोजना के पूर्व  में दिए गए आश्वाशन को  स्मरण दिलाया जाएगा। साथ ही इस योजना के नाम पर हुई लूट से भी अवगत कराया जाएगा। भारतमाला परियोजना में किसानों का उचित मुआवजा के लिय भी मांग पत्र में सम्मिलित रहेगा।

 इसलिए इन्ही मांगो के समर्थन में संयुक्त बैठक में निर्णय लिया गया कि १ मार्च को मौन मार्च का आयोजन किया जाएगा। इस मार्च का लक्ष्य होगा किसानों की मांगों का समर्थन करना, जिसमें देश के प्रधानमंत्री मोदी जी की गारंटी है। जो वो किसानों के साथ किया है वह पूरा नहीं हुआ है। इन्ही  मांगों के लिए उनका ध्यान आकृष्ट हो। तथा हमारा मौन मार्च १ मार्च को गांधी मैदान से दानी बीघा तक निकलेगा। किसानों का सांकेतिक मौन मार्च होगा। 

अध्यक्षीय भाषण में वरिष्ठ किसान नेता वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने कहा की प्रधानमंत्री तक यहां के नेता बात ही नही पहुंचा रहे है, अगर किसान संगठन प्रधानमंत्री तक बात पहुंच जाए तो सभी मुद्दों का निराकरण सरकार के फैसले से कर सकते है। संघटन को अथक प्रयास और परिश्रम करके प्रधानमंत्री तक बात पहुंचना ही होगा।

इस अवसर पर रूपेश कुमार, अशोक यादव ,पिंटूयादव,,मनीष कुमार,उमा सिंह,अमरेश सिंह,रविदुबे, राजदेव पाल,राजेंद्र प्रसाद,मोहमद अकबाल, भोला यादव किसान नेता विनय सिंह ,इत्यादि उपस्थित रहें 

Saturday, 24 February 2024

जेनिथ विद्यालय में संत रविदास जयंती पर विद्यार्थियों के संग सेमिनार आयोजन

24/02/2024,दिन शनिवार

जेनिथ विद्यालय ने संत रविदास जयंती के अवसर पर एक सेमिनार का आयोजन किया। इस सेमिनार में बच्चों को संत रविदास के जीवन और उनके विचारों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। यह सेमिनार बच्चों को समाज में समर्पित व्यक्तियों के बारे में जागरूक करने का एक माध्यम भी बना।


https://youtu.be/N8ob38fyNxs?si=VekuaX607w0sqfAY

संत रविदास जी के उदाहरण और सिद्धांतों को समझाने के लिए, विद्यालय ने विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया, जिसमें छात्रों ने उनके द्वारा रचित दोहा, पद  तथा प्रेरणादायक विचारों को साझा किया। सेमिनार में शिक्षकों और छात्रों ने साथ मिलकर संत रविदास जी के संदेशों को गहराई से समझा और उनके आदर्शों को अपनाने के महत्व को बताया।

इस संदर्भ में, विद्यालय के प्रमुख विकाश कुमार सिंह  ने कहा, "संत रविदास जी का संदेश हमें सामाजिक न्याय, भाईचारा, और समरसता की ओर अग्रसर करता है। यह सेमिनार हमें उनके विचारों को आत्मसात करने और उनके मार्गदर्शन में चलने के लिए प्रेरित करता है।"

https://youtu.be/N8ob38fyNxs?si=VekuaX607w0sqfAY

वरीय शिक्षक शिव शंकर प्रसाद ने बताया की संत रविदास जयंती हिंदू पंचाग के अनुसार माघ महीने  की पूर्णिमा तिथी पर मनाई जाती है। इनके जन्म को लेकर विद्वानों में मतभेद है। लेकिन अधिकतर विद्वान सन 1398 में माघ शुक्ल पूर्णिमा को इनका जन्म मानते है। माघ मास की पूर्णिमा को रविदास  जी ने जन्म लिया तो वह रविवार का दिन था जिसके कारण इनका नाम रविदास पड़ा।

इस सेमिनार ने छात्रों को न केवल संत रविदास जी के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में जागरूक किया, बल्कि उन्हें समाज में सजीव भागीदार बनाने के लिए भी प्रेरित किया। विद्यालय का यह पहल एक समर्पित समाज के निर्माण में एक महत्वपूर्ण कदम है।

धन्यवाद