भाकियू के बैनर तले भूमि अधिग्रहण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त महाधरना, सैकड़ों किसानों की गरजती आवाज
भारत माला परियोजना के अंतर्गत बन रहे वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में हो रहे भूमि अधिग्रहण और अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) से जुड़े सैकड़ों किसानों ने आज नबीनगर अंचल कार्यालय परिसर में एक विशाल महाधरना का आयोजन किया। इस आंदोलन में लगभग सैकड़ों महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया।
यह धरना सुबह 11 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चला। कार्यक्रम का संचालन भाकियू के सदस्य अमरेश दुबे ने किया, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ किसान नेता अवधेश प्रसाद सिंह ने की। किसानों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अनुचित, अन्यायपूर्ण और नियमविहीन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।
राजनीतिक समर्थन के साथ सरकार को चुनौती
धरने में नबीनगर के विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह तथा ग्राम पंचायत बेढ़नी के मुखिया सह राष्ट्रीय मजदूर विकास मंच के अध्यक्ष मनोज सिंह ने भी भाग लिया। विधायक डब्लू सिंह ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे "सड़क से सदन तक" उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया, “जब मुआवजा केंद्र सरकार को देना है, तो दर निर्धारण में बिहार सरकार को पीड़ा क्यों हो रही है?”
मुआवजा दर में भेदभाव पर फूटा किसानों का आक्रोश
भाकियू के जिला संयोजक वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने बताया कि सण्डा-महराजगंज से रांची फोरलेन सड़क निर्माण में किसानों को ₹30,620 प्रति डिसमिल की दर से ब्याज सहित चार गुणा मुआवजा दिया गया, जबकि इसी अंचल में भारतमाला परियोजना के तहत ₹8,000 प्रति डिसमिल की दर तय की गई है, जो सरासर अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि गया कमिश्नर कोर्ट ने भी समान मुआवजा दर का निर्णय दिया है।
कानूनी दोहरापन और निबंधन की दुहाई
प्रभावित किसान राजकुमार सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार रजिस्ट्रेशन के समय जिन भूमियों को आवासीय बताकर अधिक टैक्स वसूलती है, उन्हीं भूमियों को अधिग्रहण में खेती योग्य (धानहर) बताकर कम मुआवजा देती है। यह दोहरी नीति पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
अंचल कार्यालय की काली सच्चाई उजागर
भाकियू के जिला प्रभारी विकास सिंह ने अंचल कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए कहा कि बिना मोटी रिश्वत के कोई भी कार्य नहीं होता। हल्का कर्मचारियों ने दलाल नियुक्त कर रखे हैं, जो किसानों से अवैध वसूली कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्टर फाड़ने के दोष किसानों पर डाले जा रहे हैं, जबकि असली जिम्मेदार अधिकारी हैं।
भारतीय किसान यूनियन के नेता भोला प्रसाद ने कहा कि मैने कई परियोजना में किसान मजदूर की लड़ाई लड़ी है मुझे पता है कि इन निकम्मी प्रशासन प्राधिकरण से कैसे लड़ाई लड़ना हैं।
सरकार को चेतावनी
रवि दुबे ने कहा, “लालू यादव ने बिहार को जंगलराज बनाया था, अब नीतीश सरकार ने इसे 'पिंजड़ा राज' में बदल दिया है, जहां अफसर रिंग मास्टर बन चुके हैं और आमजन कैदी। यदि स्थिति नहीं बदली, तो हम किसान-मजदूर इस सरकार को उखाड़ फेंकने से पीछे नहीं हटेंगे।”
धरने में गूंजे नारों के साथ उठीं यह प्रमुख माँगें
- सभी प्रभावित किसानों को गया कमिश्नर द्वारा निर्धारित ₹30,620 प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा मिले।
- आवासीय और व्यवसायिक भूमि का मुआवजा भी उसी दर से दिया जाए।
- अम्बा–देव रोड के लिए भी इसी तरह मुआवजा निर्धारित किया जाए।
- परिमार्जन प्लस और एलपीसी प्रक्रिया में रिश्वतखोरी पर रोक लगे।
- खाता-खेसरा सुधार व रजिस्टर टू की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
- हल्का कर्मचारियों द्वारा दलालों के जरिए की जा रही अवैध वसूली रोकी जाए।
- गैरमजरुआ मालिक और बकाश्त मालिक भूमि का शीघ्र रैयतीकरण हो।
- मुआवजा दिए बिना किसी भूमि पर कार्य न किया जाए।
उपस्थिति
धरने में कामता पांडेय, महिला नेत्री सुधा सुमन, विनय सिंह, संतोष दुबे, रवि दुबे, रणजीत दुबे, गुप्तेश्वर यादव, विक्की सिंह, मजदूर नेता भोला यादव, राजेश यादव, बबलू सिंह, अजीत सिंह गोलू, अनिरुद्ध पांडेय , कमला पाण्डेय, मुना सिंह, रंजीत कुमार दुबे, गुप्तेश्वर यादव, रंजीवन मेहता, रामजी ,रामाश्रय सिंह, गोपाल सिंह, रणधीर सिंह, अजित कुमार सिंह, रामबचन सिंह सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे।