Wednesday, 30 April 2025

टेबल क्विज प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई गणनात्मक प्रतिभा

औरंगाबाद स्थित जेनिथ क्रैश एकेडमी में दिनांक 30 अप्रैल 2025 को “टेबल क्विज प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का उद्देश्य बच्चों में गणनात्मक कौशल, स्मरण शक्ति और मंच पर आत्मविश्वास को बढ़ावा देना था।

प्रतियोगिता दो वर्गों में आयोजित की गई — जूनियर वर्ग (नर्सरी से यूकेजी) और सीनियर वर्ग (कक्षा 1 से 5 तक)। बच्चों ने 2 से 20 तक पहाड़े संबंधित राउंड्स में भाग लिया, जिनमें तेजी, सटीकता और समझ को परखा गया। इस आयोजन में कुल 76 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

जूनियर वर्ग से रौशनी कुमारी और सीनियर वर्ग के अंतिम राउंड में वंश परमार, आयुष कुमार एवं साहिल सिद्दीकी विजेता घोषित किए गए। प्रतियोगिता का समापन पुरस्कार वितरण एवं सहभागिता प्रमाण पत्र के साथ हुआ।

बच्चों के प्रदर्शन को देखते हुए यह स्पष्ट हुआ कि प्रारंभिक कक्षाओं में ही यदि तार्किक दक्षता को प्रोत्साहित किया जाए, तो बालमन बड़े कौशल के साथ सीख सकता है। विद्यालय द्वारा दी गई पूर्व सूचना के कारण अभिभावकों की भागीदारी भी सराहनीय रही।

यह गतिविधि न केवल शैक्षिक थी बल्कि विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और सहयोग भावना को बढ़ाने वाली रही। गणित को खेल और प्रतियोगिता के रूप में प्रस्तुत करने का यह प्रयास बच्चों और शिक्षकों — दोनों के लिए उत्साहवर्धक सिद्ध हुआ। इस अवसर पर शिक्षिका आस्था प्रिया, रानी शर्मा, खुशबू शर्मा, रागनी कुमारी , अंजलि सिंह तथा हर्षित पाठक मौजूद रहें।

जबरन भूमि कब्जा को लेकर किसानों का फूटा गुस्सा , किया नबीनगर अंचलाधिकारी का पुतला दहन !

भारतमाला परियोजना अंतर्गत निर्माण हो रहे वाराणसी से कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में अन्यायपूर्ण हो रहे भूमि अधिग्रहण को लेकर किसानों में भारी आक्रोश है ।

बीते मंगलवार को नबीनगर अंचलाधिकारी निकहत प्रवीन भारी पुलिसबल और पीएनसी कंपनी के मशीनों के साथ पचमों, परसा, नेरुआ गांव में पहुंच सैकड़ों बीघा जमीन मशीनों से रौंदवा डाली ।


बिना मुआवजा मिले जबरदस्ती भूमि कब्जा को लेकर किसानों में भारी आक्रोश उत्पन्न हो गया है । 

इसी नाराजगी को लेकर आज किसानों नें पचमों गांव में अंचलाधिकारी निकहत प्रवीन का पुतला दहन किया ।

मौके पर उपस्थित भारतीय किसान यूनियन के जिला संयोजक वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि बिना उचित मुआवजा दिए सरकार दमन की नीति बंद करे अन्यथा इन अधिकारियों के खिलाफ हम अदालत का रूख करेंगे । श्री सिंह ने कहा कि हम इनके मनमानी रवैया और दमनकारी नीति के खिलाफ आंदोलन को और उग्र करेंगे। पचमो, परसा, नेरुआ, बेलौटी के किसान एक दो दिन के अंदर प्रभावित स्थल पर अनिश्चितकालीन धरना देने का काम शुरू करने वाले हैं, वहीं जिला मुख्यालय औरंगाबाद में आगामी छे मई को किसान महाधरना के माध्यम से सरकार को चेतावनी देने का काम करेंगे !


मौके पर आये भाकियू के सदस्य राज कुमार सिंह नें सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इस सरकार के पास अपने मित्र नीरव मोदी, मेहुल चौकसी,विजय माल्या, नितिन संदेसरा, जतिन मेहता, ललित मोदी, ऋषि अग्रवाल आदि को विदेश में मौज कराने के लिए अरबों खरबों है पर किसान को उसके जमीन के बदले मुआवजा देने के लिए पैसा नहीं है ! राजकुमार सिंह ने सरकार से पूछा कि जी टीवी के खरबपति मालिक सुभाष चंद्रा का सात हजार करोड़ रू का ऋण माफ करने के लिए पैसा है फिर किसानों को उचित मुआवजा क्यों नहीं दिया जा रहा ?

पचमों गांव निवासी अमरेश दुबे ने लोकतांत्रिक ब्यवस्था पर सवाल उठाते हुए संदेह व्यक्त किया कि किसान आज भी आजाद नहीं हुआ है ! उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का आदेश, बिना मुआवजा दिए भूमि पर कब्जा नहीं किया जा सकता बावजूद भारी पुलिसबल के सहारे हमारे जमीनों का कब्जा किया जा रहा है फिर किसान आजाद कैसे है ?

पुतला दहन के मौके पर बीरेंद्र सिंह, महेश सिंह, रवि दुबे, कृष्णा दुबे,अरुण दुबे, अजय दुबे,मधुसूदन प्रसाद आदि पचासों किसान उपस्थित थे ।

Tuesday, 8 April 2025

भूमि अधिग्रहण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त महाधरना, सैकड़ों किसानों की गरजती आवाज

भाकियू के बैनर तले भूमि अधिग्रहण और भ्रष्टाचार के खिलाफ सशक्त महाधरना, सैकड़ों किसानों की गरजती आवाज

भारत माला परियोजना के अंतर्गत बन रहे वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में हो रहे भूमि अधिग्रहण और अंचल कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार व रिश्वतखोरी के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) से जुड़े सैकड़ों किसानों ने आज नबीनगर अंचल कार्यालय परिसर में एक विशाल महाधरना का आयोजन किया। इस आंदोलन में लगभग सैकड़ों महिला एवं पुरुष किसानों ने भाग लिया।


यह धरना सुबह 11 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चला। कार्यक्रम का संचालन भाकियू के सदस्य अमरेश दुबे ने किया, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ किसान नेता अवधेश प्रसाद सिंह ने की। किसानों ने भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को अनुचित, अन्यायपूर्ण और नियमविहीन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया।


राजनीतिक समर्थन के साथ सरकार को चुनौती
धरने में नबीनगर के विधायक विजय कुमार सिंह उर्फ डब्लू सिंह तथा ग्राम पंचायत बेढ़नी के मुखिया सह राष्ट्रीय मजदूर विकास मंच के अध्यक्ष मनोज सिंह ने भी भाग लिया। विधायक डब्लू सिंह ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे "सड़क से सदन तक" उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर साथ रहेंगे। उन्होंने सवाल उठाया, “जब मुआवजा केंद्र सरकार को देना है, तो दर निर्धारण में बिहार सरकार को पीड़ा क्यों हो रही है?”


मु
आवजा दर में भेदभाव पर फूटा किसानों का आक्रोश

भाकियू के जिला संयोजक वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने बताया कि सण्डा-महराजगंज से रांची फोरलेन सड़क निर्माण में किसानों को ₹30,620 प्रति डिसमिल की दर से ब्याज सहित चार गुणा मुआवजा दिया गया, जबकि इसी अंचल में भारतमाला परियोजना के तहत ₹8,000 प्रति डिसमिल की दर तय की गई है, जो सरासर अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि गया कमिश्नर कोर्ट ने भी समान मुआवजा दर का निर्णय दिया है।


कानूनी दोहरापन और निबंधन की दुहाई
प्रभावित किसान राजकुमार सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार रजिस्ट्रेशन के समय जिन भूमियों को आवासीय बताकर अधिक टैक्स वसूलती है, उन्हीं भूमियों को अधिग्रहण में खेती योग्य (धानहर) बताकर कम मुआवजा देती है। यह दोहरी नीति पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।


अंचल कार्यालय की काली सच्चाई उजागर
भाकियू के जिला प्रभारी विकास सिंह ने अंचल कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलते हुए कहा कि बिना मोटी रिश्वत के कोई भी कार्य नहीं होता। हल्का कर्मचारियों ने दलाल नियुक्त कर रखे हैं, जो किसानों से अवैध वसूली कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्टर फाड़ने के दोष किसानों पर डाले जा रहे हैं, जबकि असली जिम्मेदार अधिकारी हैं।

भारतीय किसान यूनियन के नेता भोला प्रसाद ने कहा कि मैने कई परियोजना में किसान मजदूर की लड़ाई लड़ी है मुझे पता है कि इन निकम्मी प्रशासन प्राधिकरण से कैसे लड़ाई लड़ना हैं।


सरकार को चेतावनी
रवि दुबे ने कहा, “लालू यादव ने बिहार को जंगलराज बनाया था, अब नीतीश सरकार ने इसे 'पिंजड़ा राज' में बदल दिया है, जहां अफसर रिंग मास्टर बन चुके हैं और आमजन कैदी। यदि स्थिति नहीं बदली, तो हम किसान-मजदूर इस सरकार को उखाड़ फेंकने से पीछे नहीं हटेंगे।”

धरने में गूंजे नारों के साथ उठीं यह प्रमुख माँगें

  1. सभी प्रभावित किसानों को गया कमिश्नर द्वारा निर्धारित ₹30,620 प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा मिले।
  2. आवासीय और व्यवसायिक भूमि का मुआवजा भी उसी दर से दिया जाए।
  3. अम्बा–देव रोड के लिए भी इसी तरह मुआवजा निर्धारित किया जाए।
  4. परिमार्जन प्लस और एलपीसी प्रक्रिया में रिश्वतखोरी पर रोक लगे।
  5. खाता-खेसरा सुधार व रजिस्टर टू की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।
  6. हल्का कर्मचारियों द्वारा दलालों के जरिए की जा रही अवैध वसूली रोकी जाए।
  7. गैरमजरुआ मालिक और बकाश्त मालिक भूमि का शीघ्र रैयतीकरण हो।
  8. मुआवजा दिए बिना किसी भूमि पर कार्य न किया जाए।

उपस्थिति
धरने में कामता पांडेय, महिला नेत्री सुधा सुमन, विनय सिंह, संतोष दुबे, रवि दुबे, रणजीत दुबे, गुप्तेश्वर यादव, विक्की सिंह, मजदूर नेता भोला यादव, राजेश यादव, बबलू सिंह, अजीत सिंह गोलू, अनिरुद्ध पांडेय , कमला पाण्डेय, मुना सिंह, रंजीत कुमार दुबे, गुप्तेश्वर यादव, रंजीवन मेहता, रामजी ,रामाश्रय सिंह, गोपाल सिंह, रणधीर सिंह, अजित कुमार सिंह, रामबचन सिंह सहित सैकड़ों किसान मौजूद थे।