नोटिस दिए बगैर निर्माण कराने पहुंचे सीओ, मांगों को लेकर अड़े किसान
*नोटिस दिए बगैर निर्माण कराने पहुंचे सीओ, मांगों को लेकर अड़े किसान*
अंबा औरंगाबाद। भारतमाला परियोजना के तहत वाराणसी- कोलकाता एक्सप्रेसवे में जमीन का अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए कुटुंबा अंचल अधिकारी चंद्र प्रकाश, कुटुंबा थानाध्यक्ष अक्षयवर सिंह और पीएनसी कंपनी के अधिकारी मंगलवार की दोपहर दलबल के साथ रामपुर गांव पहुंचें जहां उन्हें ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अंचल अधिकारी और किसानों के बीच पांच घंटे तक वार्ता चली लेकिन किसान उचित मुआवजा लिए बगैर निर्माण कार्य शुरू न करने की बात पर अड़े रहे। किसानों ने कहा कि रामपुर गांव के किसानों को न तो नोटिस दिया गया है और ना ही मुआवजा। लेकिन प्रशासन जबरन निर्माण कार्य शुरू कराना चाहती है। खबर लिखे जाने तक प्रशासन और किसान आमने-सामने डटे हुए हैं। प्रशासन किसानों को रात में घर जाने का इंतजार कर रही है। उनका कहना है कि रात में भी निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। इधर किसान भी कार्यस्थल पर डटकर विरोध कर रहे हैं। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन के संयोजक वशिष्ठ सिंह, नरेंद्र कुमार, विकास कुमार सिंह, ललन सिंह, रमाकांत पांडेय समेत सैकड़ो किसान उपस्थित थे।
*सरकारी दावे और प्रशासन के कार्य प्रणाली में विसंगतियों से उठ रहे प्रशासन पर सवाल*
विभिन्न सरकारी परियोजनाओं में जमीन का अधिग्रहण और मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का प्रदर्शन प्रखंड क्षेत्र में ज्वलंत मुद्दा बनकर उभर रहा है। उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का संघर्ष यह बयां कर रहा है कि अधिग्रहण को लेकर सरकार की नीति और पदाधिकारियों की कार्यवाही में विसंगति है। भूमि सुधार एवं राजस्व मंत्रालय के वरीय सचिव दीपक कुमार ने भूमि अधिग्रहण में आ रही समस्याओं को सुलझाने के लिए सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि वे अपने जिला में पांच सदस्यीय टीम गठित करें। जो अधिग्रहित जमीन का सात प्रकार से वर्गीकरण करते हुए पुनर्मूल्यांकन कर उचित दर तय करेंगे। लेकिन उक्त आदेश को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा कोई भी प्रयास धरातल पर नजर नहीं आ रहा है। भारतमाला परियोजना में अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को 2012 के सर्किल रेट से मुआवजा राशि दी जा रही है। जो सरकार की नीति के विरुद्ध है। जिला प्रशासन सरकार की नीति के विरुद्ध कार्य क्यों कर रही है इसका जवाब तो वही दे सकती है लेकिन किसान अपने हक और उचित मुआवजे को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में है। किसानों का कहना है कि वे जान दे देंगे लेकिन उचित मुआवजा लिए बगैर एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। प्रखंड और जिला कार्यालय में प्रदर्शन के बाद किसान कमिश्नर ऑफिस गया का घेराव करने की मूड में है। किसानों के संघर्ष ने जिला प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है। अब देखना है कि वह किसानों के संघर्ष का और इम्तिहान लेगी या सरकारी नीतियों के तहत किसानों को मुआवजा का भुगतान करेगी।
*प्रखंड में हो एक मुआवजा दर*
किसानों का कहना है कि नेशनल हाईवे 98 पर बन रहे हरिहरगंज बाईपास निर्माण में अधिग्रहित जमीन का मुआवजा जिस दर से कुटुंबा प्रखंड के डेहरी गांव के किसानों को दी गई है, उसी दर से हमें भी मुआवजा राशि दी जाए। विदित हो कि डेहरी गांव के किसानों को प्रति डिसमिल 30620 के दर से चार गुना मुआवजा राशि ब्याज सहित दी गई है। वहीं भारतमाला परियोजना के तहत अधिग्रहित जमीन का मुआवजा 8000 रुपए के दर से दिया जा रहा है।
*जबरन निर्माण कराने का प्रयास क्यों कर रही प्रशासन*
किसान कार्यस्थल पर निर्माण कार्य का विरोध कर रहे हैं और प्रखंड व जिला मुख्यालय में प्रदर्शन कर अपने हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं प्रशासन कार्यस्थल पर सैकड़ों सुरक्षा बलों की तैनाती कर जबरन निर्माण कार्य शुरू कराने का लगातार प्रयास कर रही है। जहां किसानों की संख्या अधिक है वहां विरोध के बाद प्रशासन को वापस लौटना पड़ रहा है लेकिन जहां गिनती की संख्या में किसान हैं वहां जबरन निर्माण कार्य शुरू करा दिया जा रहा है। जिसका उदाहरण है प्रखंड क्षेत्र का पोला गांव। नेशनल हाईवे 98 पर हरिहरगंज बाईपास निर्माण में पोला गांव के किसानों को सुरक्षा बलों का भय दिखा कर निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है। पदाधिकारियों द्वारा किसानों को कहा गया कि हम वरीय अधिकारियों के आदेश का पालन कर रहे हैं। आप मुआवजे के लिए न्यायालय की शरण में जाएं। वहीं नवीनगर प्रखंड में कार्यस्थल पर विरोध करने के कारण कुछ लोगों को पकड़ कर थाना ले जाया गया ताकि किसानों में भय पैदा किया जा सके लेकिन किसानों की एकजुटता के बाद उन्हें थाना परिसर से ही छोड़ दिया गया। इधर कुटुंबा प्रखंड क्षेत्र के दरियापुर गांव में भी प्रशासन ने जबरन निर्माण कार्य शुरू कराना चाहा तब आसपास के गांव के सैकड़ो किसानों और जनप्रतिनिधियों के पुरजोर विरोध के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। किसान उचित मुआवजा लेकर जमीन देने को तैयार हैं फिर कैंप लगाकर किसानों की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा है। प्रशासन किसानों पर पुलिस बल का प्रयोग कर जबरन निर्माण कार्य क्यों कराना चाह रही है। यह सरकार, प्रशासन और समाज के समक्ष बड़ा सवाल है।











