Wednesday, 15 March 2023

वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे पीड़ित किसानो के अधिकारों के लिए शंखनाद

 

जिला औरंगाबाद में राष्टीय राजमार्ग प्राधिकरण के भारत माला परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावित वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे के लिए जिला समाहर्ता औरंगाबाद के द्वारा भूमि –अधिग्रहण का कार्य प्रगति पर है कल दिनांक हिंदुस्तान (15/03/2023) के दैनिक समाचार पत्र में भारत सरकार के राजपत्र 3 डD 825 का प्रकाशन कराया गया है हिंदुस्तान और हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में 02/08/2022 में 3 A का प्रकाशन पहले कराया जा चूका है

जिला प्रशासन का कहना है की 3 A के प्रकाशन के बाद 21 दिनों के अंदर आपति ली जानी थी । जिन किसानो ने आपति दी, उन किसानो की आपेक्षों को सुन लिया गया । 3 C के तहत इसके बाद 3 D प्रकाशन कराया गया हैं ।

किसान संघर्ष समिति वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस वे के पीड़ित , प्रभावित किसानों का कहना है की अधिकतर किसानों को 3 A के बारे में जानकारी या सूचना नहीं मिला तर्क ये दिया की किसानो की इतनी क़ानूनी जानकारी नहीं होती हैउनके घर में समाचार पत्र नहीं आता है किसान संघर्स समिति का जागरूकता और आंदोलन के कारण आज हम 3 D के बारे में जान पाए है


इस बाबत किसान संघर्ष समिति का शिष्टमंडल जिला पदाधिकारी महोदय सह भू अर्जन पदाधिकारी से अपनी मांगो को रखा था । लेकिन जिला अधिकारी महोदय ने स्पष्ट रूप से किसानों की बात मानने से इंकार कर दिया था । भू अर्जन के द्वारा भी वही बात दोहराई गई। जो जिला पदाधिकारी ने बताया उनलोगों ने कहा की एक्ट के विरुद्ध हो  रहा है तो बोलिए जो कानून है वही होगा ना ।जिला पदाधिकारी महोदय ने यह भी कही की व्याकुलता में मत रहिए बल्कि आपलोगों को खुश होना चाहिए ।आपको भाग्यशाली समझना चाहिए की ये परियोजना आपके क्षेत्र से गुजर रही है। आपलोगों का वैल्यू बढ़ जायगा । हमारे लिए तो सभी किसान अध्यक्ष हैं ।


किसानो का दर्द यह है। उनकी जीविका का आधार खो रहा है । अपने खून पसीने मेहनत की कमाई से अपने परिवार का लालन पोषण , शिक्षण , सांस्कृतिक , सामाजिक और आर्थिक संवहन कर लेते थे। जब उनकी जमीन चली जायगी तो उनके साथ उन कृषक श्रमिको का क्या होगा ? यह सोंच सोंच के किसान और श्रमिक घोर अवसाद के शिकार हो रहे हैं । किसान भाइयो का कलेजा फट रहा है की मेरी वर्षो पुरानी विरासत धरोहर माँ का चिर हरण होने वाला है ।  अब नहीं बोलेंगे तो अपनी धरती माँ को मुहं क्या दिखलायेंगे ?


जब लोगों को किसान संघर्ष समिति के  अध्यक्ष वीरेंद्र पाण्डेय के माध्यम से किसानों को जब पता चला तो प्रकृति को लेकर भारी गड़बड़ी है । जैसे की जिन किसानो का जमीन आवसीय, राष्टीय राजमार्ग के किनारे , राज्य राजमार्ग के किनारे , प्रधान मंत्री सड़क योजना के किनारे , ग्राम सड़क के किनारे है, उनका भी प्रकृति के सर्वे में सर्वेयर ने किसी का भीठ, परती कदीम ,धनहर लिखा गया । किसानों का आपति है की जो राष्टीय राजमार्ग और राज्य राजमार्ग के किनारे या सटे की जमीन है, उसकी प्रकृति व्यवसायिक की जाए तथा जिनकी जमीन  ग्राम सड़क के किनारे है,  उनकी जमीन की प्रकृति आवासीय की जाए । लेकिन लगातार जिला समाहर्ता के द्वारा विधि पूर्वक कड़ी आगे बढाई जा रही है । किसान असमर्थ और लाचार होते दिख रहे है ।


राजन तिवारी मिडिया प्रभारी का कहना है सेम परियोजना में सड़क की किनारे की जमीन का मूल्यांकन महँगी दरों पे किया जाता है, इससे समर्थित उनके पास दस्तावेज है परन्तु यहाँ जिला समाहर्ता के द्वारा कहना है की नहीं हम तो MVR से ही आकलन करेंगे इस बात पर किसानो को हजम नहीं हो रहा है , किसान चाहते है की हमें उचित मुआवजा मिले जिससे की हम आगे की जीविका का साधन बना सके और अपने परिवार समाज को बिखरने से बचा ले ।


क्रांतिकारी नेता राज कुमार सिंह का कहना है की जब जमीन का कर हमने व्यवसायिक तथा आवसीय भुगतान बिहार राज्य को किया है तो हम मुआवजा एक ही तराजू धनहर के नाम से कैसे ले ले । यहाँ पर समाहर्ता द्वारा कहा जा रहा है। वर्तमान स्वरुप तो आप हमसे कैसे कर ले लिए । इस मामले पे भी किसानो में ज्वाला की चिंगारी भड़क रही है जो कभी भी शोला बन कर उभर सकती है।


किसान संघर्ष समिति के मिडिया प्रभारी विकाश कुमार सिंह ने कहा की हम किसान धैर्यशील है, हमारी धरती माँ परीक्षा ले रही है ,आत्म विश्वाश को कमजोर नहीं होने देना हैं, मजबूती से डटकर मुकाबला विधि पूर्वक क़ानूनी पूर्वक करना है और लोकतंत्र में सबको आवाज बुलंद करने का अधिकार है। कानून के विरोध में ही सही किसान बिल भी लाया गया था ।अगर आत्मबल कमजोर होता तो वह भी किसानो पर थोप दिया जाता इसलिय धैर्य राखिय अनुसाशन बनाये रखे हम विधि पूर्वक अपनी लड़ाई लड़ेंगे और हम लड़ेंगे हम जीतेंगे ।

Friday, 10 March 2023

डीएम ने नहीं मानी बात , किसान करेंगे आन्दोलन

 


भारत माला परियोजना के तहत ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे में की जा रही भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रभावित किसान काफी रोष में है , आज किसान संघर्ष समिति के ११ सदिस्य शिष्ट मंडल ने जिला पदाधिकारी से मिलकर अपनी मांगो को दोहराया लेकिन एक भी मांग मानने से जिला पदाधिकारी ने इंकार कर दिया इस बात को लेकर किसान काफी चिंतित और हताश है , इस बाबत किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष वीरेंदर पाण्डेय ने कहा की अब हमारे सामने केवल दो ही विकल्प है एक न्यायलय और दूसरा आन्दोलन कहा की सरकार और अफसरों की मनमानी नहीं चलने देंगे अपना हक़ लेकर रहेंगे

किसानो का शिष्टमंडल एडीम सह भू अर्जन पदाधिकारी से भी मिला उनके साथ हुई लम्बी वार्ता में कई प्रश्न किय गए उन्होंने उसका उत्तर दिया एक भी उत्तर किसान के पक्ष में नहीं था उनसे जब पूछा गया वैसे भूमि जो सड़क के किनारे है या राष्टीय राजमार्ग के किनारे है उसका मुआवजा किसान को क्या मिलेगा तो उन्होंने स्पष्ट रूप से बाताया की हमें निर्देश प्राप्त है भूमि चाहे जहाँ की भी हो वर्तमान स्वरुप में यदि खाली है तो उसे भीट धनहर का ही मुआवजा दिया जायेगा

किसान संघर्ष समिति के मिडिया प्रभारी राजन तिवारी और विकाश कुमार सिंह ने जब उनसे सवाल किया की वैसे अधिग्रहण वाली भूमि जो आवासीय दर पर केवाला के माध्यम से खरीदगी की गई और सरकार को आवासीय कर भुगतान किया गया है वैसी जमीनों को क्या होगा जिसमे आवास नहीं है तो उस जमींन का क्या मुआवाज मिलेगा इस सवाल पर भी भू अर्जन पदाधिकारी ने भारत सरकार के NHAI कानून का हवाला देते हुए कहा की हम ऐसे जमीन का भी आवासीय भुगतान नहीं करेंगे

शिष्टमंडल का यह भी सवाल था NHAI के तहत दिल्ली कटरा एक्सप्रेस वे में किसानो को मुआवजा नेशनल हाईवे के किनारे एक करोड़ बयासी लाख चालीस हजार तीन सौ बीस रूपए प्रति एकड़ मुआवजा दिया गया है तो यहाँ के नेशनल हाईवे के किनारे के जमीनों का मुआवजा कटरा एक्सप्रेस वे के अनुरूप क्यों नहीं है इस पर पदाधिकारी ने अपने आप को सरकार के दिशा निर्देश पर बंधे होने के हवाला देते हुए किसानो को न्यायलय में जाने का सुझाव दिया

इस मौके पर किसान संघर्ष समिति के अधयक्ष विरेंद पाण्डेय, सचिव जगत सिंह , बलराम सिंह , रमाकांत पाण्डेय , विजेंद्र पाण्डेय , राज कुमार सिंह , आदि उपस्थित थे